ये जवानी कुरुक्षेत्र हैं, यहां नशे का कोई स्थान नहीं,
यहां अर्जुन चाहिए, भटके हुए इंसान नहीं।
हमारे हाथों में डिग्री होगी,नशे की पुड़िया नहीं,
हमारी आंखों में भविष्य होगा ,नशे की दवा नहीं।
ये जवानी आग है,इसे धुएं में मत जलाओ,
ये हाथ कलम के हैं,इन्हें बोतल से मत मिलाओ।
नशा करना ही है तो तरक्की का कर,
नाम करना ही है तो मेहनत से कर,
तोड़ दे ये जंजीरें जो तुझे कमजोर करती हैं,
क्योंकि तेरे कदमों से ही दुनिया चलती हैं।
धुएं से मत उड़ाना अपने अरमानों को,
सिगरेट की राख मत बनाना इरादों को।
शराब की बोतल में मत डुबोना वक्त को,
तेरे कंधों पर देश है कल को।
टूटे घर, बिखरे रिश्ते,बर्बाद जवानी,
नशे ने दी है बस यही निशानी।
-उषा कुमारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X