आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कुछ गुफ्तगू ऐसी रही, जो दिल में हमारे घर कर गई ।

                
                                                         
                            कुछ गुफ्तगू ऐसी रही, जो  दिल में हमारे घर कर गई ।
                                                                 
                            
संभाला दिल को बहुत ही, पर आंखों की नींद उड़ गई।
दिल को यह बात पता है कि तुम भी सुकुन से सोयी नहीं।
अच्छा होता भूल कर बीती बातें, आओ गिला-शिकवा हम मिटा दें।
बस यह पैगाम मेरे दिल,का, उनके पास कोई तो भिजवा दे।
-श्याम कुमार सागर
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
11 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर