कुछ गुफ्तगू ऐसी रही, जो दिल में हमारे घर कर गई ।
संभाला दिल को बहुत ही, पर आंखों की नींद उड़ गई।
दिल को यह बात पता है कि तुम भी सुकुन से सोयी नहीं।
अच्छा होता भूल कर बीती बातें, आओ गिला-शिकवा हम मिटा दें।
बस यह पैगाम मेरे दिल,का, उनके पास कोई तो भिजवा दे।
-श्याम कुमार सागर
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