वो आठ साल का लड़का, कूड़े का कट्टा जिसके हाथ है।
उम्र जिसकी बचपन की पर सर पे चिंताएं उसके पचपन की।
चुपचाप से आ जाता हर गाड़ी के पास है, करता न कोई बात है।
पल भर में उसको पता चल जाता, तुम पैसा दोगे या न दोगे, वो करता न अपना समय खराब है। फिर सरपट से भाग कर जाता दूसरी गाड़ी के पास, होता न उदास है।
वो आठ साल का लड़का, कूड़े का कट्टा जिसके हाथ है।
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