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वाक्त़ का सिक्का

                
                                                         
                            **** वाक्त़ का सिक्का ****
                                                                 
                            

दुनिया में बड़ा सिंहासन वक्त़ का होता है
न सोना लगता है ,न हीरे-जवाहरात लगते हैं
फिर भी बादशाह, वजीर उसके आगे झुकते हैं

वाक्त़ कहता है कि ,कल मैं आऊं या नहीं
ये मुझे खुद भी पता नहीं है
आया तो हंसाऊंगा या रूलाऊगां
इसका सिलसिला भी नहीं है

जीना है तो आज ,जी भर कर जी ले
कल कैसा हाल हो ,क्या करें शिकवे गिले
आज का ये पल, कल रोक नहीं पाऊंगा
क्योंकि वक्त़ का सिक्का, किसी के हाथ में नहीं है
-क्षमा अर्ली गीत
 
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3 महीने पहले

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