वो गलियां जो पीछे छोड़ आए हैं
वो गलियां जो पीछे छोड़ आए हैं
जहां बचपन हंसता था कुछ सपने सजते थे
खुशबू थी मिटटी की आवाजे अपनों की
अपनों से मुंह यूं मोड़ आए हैं
वो गलियां जो पीछे छोड़ आए हैं ..........
पीछे मुड़कर देखे तो आंखें भर आएंगी
अगर रुके जरा तो सांसे थम जाएंगी
न जाने जिंदगी को किसी ओर लाए हैं
वह गलियां जो पीछे छोड़ आए हैं...........
लौट आए वो दिन तो क्या फर्क पड़ेगा
याद सब ताजा पाएंगे जब भी कोई जिगर चलेगा
वो ठहर गए पुराने पल अब नये पल और आए हैं
वह गलियां जो पीछे छोड़ आए हैं...........
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