वो चाहत के दिन अब पुराने हो गए हैं,
तेरी गली से गुज़रे ज़माने हो गए हैं।
जिन ख़तों में कभी दिल की बातें लिखी थीं,
वो पन्ने भी अब सारे फ़साने हो गए हैं।
तेरी तस्वीर से जो बातें किया करते थे,
वो लम्हे भी अब दिल से बेगाने हो गए हैं।
कभी तेरी ख़बर से साँस चलती थी हमारी,
अब तेरे ज़िक्र के भी बहाने हो गए हैं।
भुलाने की बहुत हमने कोशिश की मगर,
कुछ ज़ख़्म तो उम्रों के निशाने हो गए हैं।
तुम छोड़ गए शहर, मगर दिल ने नहीं छोड़ा,
तेरे शहर में अब मेरे ठिकाने हो गए हैं।
जिसे खोकर लगा था कि अधूरे हैं हम,
उसी के बाद ख़ुद से सयाने हो गए हैं।
‘विरेन’ वो लौट भी आए तो मौसम नहीं लौटे,
तेरे शहर में रहकर भी हम पुराने हो गए हैं।
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