सिर्फ मेरे खुदा ने मुझे समझा है
मुझे कभी किसी ने नहीं समझा,
सिर्फ मेरे खुदा ने मुझे समझा है।
अकेले रोती थी, बिलखती थी,
पर किसी ने नहीं जाना,
किसी ने नहीं समझा।
अंदर ही अंदर मरती थी,
पर हर सुबह इसी उम्मीद के साथ उठती थी—
“आज तो कोई मिलेगा,
जो मुझे समझेगा…”
लेकिन हर दिन की तरह
वो दिन भी बीत जाता,
और आज फिर…
किसी ने मुझे नहीं समझा।
मेरी चुप्पी को किसी ने नहीं समझा,
मेरी खामोशी को किसी ने नहीं पढ़ा,
मेरी आँखों में छिपे सवालों को
किसी ने नहीं जाना।
संसार ने मेरी मुस्कान तो देखी,
पर मेरी आँखों का दर्द नहीं देखा।
मैंने सबको अपना समझा,
पर किसी ने मुझे अपना न समझा।
फिर एक दिन ऐसा आया
जब मुझे ये समझ आया—
समझने वाला तो एक ही है,
जो मुझे समझता भी है
और मुझे जानता भी है।
मेरे मन की हर बात
वो बिना कहे जान लेता है,
मेरी खामोशी में छिपी आवाज़ को
वो सुन लेता है।
मैंने बिना कहे जो बातें कहीं,
वो भी मेरे खुदा ने सुन लीं।
जो दर्द मैं दुनिया से छुपाती रही,
उसकी नज़र से वो कभी न छुप सका।
उसने मुझे पढ़ लिया,
उसने मुझे जान लिया,
उसने मुझे समझ लिया।
उसकी दी हुई शांति में
मुझे आनंद मिलता है,
उसके होने से
मेरी रूह को सुकून मिलता है।
इसलिए आज मैं कहती हूँ—
मुझे कभी किसी ने नहीं समझा,
मेरे खुदा ने मुझे समझा है।
अकेली होकर भी
मैं पूरी तरह अकेली नहीं हूँ,
क्योंकि मुझे पूरा करने वाला
वो है।
दुनिया चाहे मुझे न समझे,
पर मेरा खुदा
मुझे मुझसे भी बेहतर समझता है।
यही मेरी शांति है,
यही मेरा सुकून है—
कि जब कोई मेरा नहीं होता,
तब भी मेरा खुदा मेरे साथ होता है।
और शायद यही वजह है
कि अब मुझे किसी के समझने का इंतज़ार नहीं…
क्योंकि मेरा खुदा
मेरी हर खामोशी समझता है,
मेरी हर पुकार सुनता है,
और मेरे दिल की
हर अनकही बात जानता है।
मुझे कभी किसी ने नहीं समझा…
सिर्फ मेरे खुदा ने मुझे समझा है।
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