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शाम ढलती जाती है

                
                                                         
                            शाम यूं ही ढलती जाती है
                                                                 
                            
और रात यूही गुजरती जाती है
तेरी एक झलक पाने को ये अंखिया
मेरी तरस सी जाती है
हर पल यही एहसास होता है
की तू है यही कही मेरे आस पास
तेरी तस्वीर को जब भी देखूं तो आंख
मेरी भर ही आती है
शाम ढलती जाती है
और रात यूही गुजरती जाती है
तेरा वो मुझसे रूठ जाना
पर फिर पल भर में मान जाना
अब तो ऐसा लगता है मार ही देगा
मुझको तेरा ये दूर जाना
अब तन्हाई में मेरी परछाई साथ छोड़ जाती है
शाम ढलती जाती है और
रात यूही गुजरती जाती है
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एक दिन पहले

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