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मेरी वापसी अभी बाकी है

                
                                                         
                            मेरी वापसी अभी बाकी है
                                                                 
                            

कदम भले ही थके हुए हैं,
फिर भी मैंने राह न छोड़ी।
धुँध ने चाहे दिशा छिपाई,
मन ने अपनी चाह न छोड़ी।

रात घनी हो, दीप बुझें तो,
आशा फिर भी साथ खड़ी है।
टूटे सपनों की राख तले,
एक नई चिंगारी पड़ी है।

गिरकर उठना सीखा मैंने,
दर्द को अपना गीत बनाया।
जिसने मुझको रोकना चाहा,
उसने ही साहस जगाया।

सूनी राहें, सूने मौसम,
फिर भी मन में आस बची है।
बीते कल की धूल हटाकर,
जीने की फिर प्यास बची है।

हार नहीं है ठहराव मेरा,
यह तो बस तैयारी है।
जिस मंज़िल को दूर समझते,
उसकी आहट प्यारी है।

कल फिर सूरज उगेगा निश्चित,
फिर आकाश नया होगा।
मेहनत की हर बूँद से मेरा,
सपनों का संसार खिला होगा।

जो छूटा है, लौटेगा फिर से,
जो टूटा है, जुड़ जाएगा।
मेरी चुप्पी बोल उठेगी,
मेरा समय बदल जाएगा।

कदम भले ही थके हुए हैं,
पर हौसला अब भी बाकी है।
राह कठिन है, रात बड़ी है,
पर मेरी वापसी अभी बाकी है।
-संतोष कुमार शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 घंटे पहले

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