मेरे आंगन में पधारी एक नन्ही सी चिड़िया,
उसकी चहचहाट से पूरा आंगन चहक उठा,
उसकी आँखों की चमचमाहट से,
किनारे रखे फूलों की कलिया खिल उठी,
फूलों पर भंवरे मंडराने लगे,
उसके पंखों की फड़फड़ाहट से मानो,
आंगन अब आंगन नहीं रहा,
एक मुस्कुराता हुआ बगीचा बन गया,
एक नन्ही सी चिड़िया ने मेरे आंगन को,
अपनी चहचहाट से महका दिया!
-आकांक्षा गुप्ता
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