मेरा दोस्त मेरी कविताएं है जनाब,
जो सिर्फ मुझे लिखने का ही जज्बा नहीं देती,
बल्कि मुझे मेरे अंदर के भाव से भी मिलाती है,
न कभी मुझे बोर करती, न मुझे कभी दुखी करती,
यह सिर्फ मेरी जिंदगी का भाग नहीं है,
यह मेरी तक़दीर है, जिसे कुदरत ने निखारा है,
मैं शुक्रिया करती हूं मेरी कविताओं से,
जिन्होंने मुझे इस हुनर का प्रतिभागी समझा,
मुझे अपनी लेखनी का हिस्सा बनाया।
-आकांक्षा गुप्ता
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X