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मैं इतिहास गढता रहूंगा

                
                                                         
                            मैं इतिहास गढता रहूंगा
                                                                 
                            

तूफानों से नहीं डरूंगा अपनी धुन में बढ़ता रहूंगा
मंजिल खुद आकर बोलेगी मैं इतिहास गढता रहूंगा

रुकना नहीं है मुझको थकना भी नहीं है
दुनिया क्या कहती है उसकी परवाह भी नहीं है
अपनी धुन में आगे चलता रहूंगा
मंजिल खुद आकर बोलेगी मैं इतिहास गढता रहूंगा

यह आलम की रफ्तार है कोई पकड़ नहीं सकता
धीमी है यह चाल पर जमाने का फर्क नहीं पड़ता
सो गए हैं रास्ते में आंधियों से लड़ता रहूंगा
मंजिल खुद आकर बोलेगी मैं इतिहास गढता रहूंगा

यह जुनून नहीं राम नाम की लगन है
यह फितूर नहीं आलम की जीत का जश्न है
तेरी संगीन राहें संवारता रहु़गां
मंजिल खुद आकर बोलेगी मैं इतिहास गढता रहूंगा

 
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1 सप्ताह पहले

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