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माँ का कर्ज़ न चुकाया जा सकता जनाब,

                
                                                         
                            माँ का कर्ज़ न चुकाया जा सकता जनाब,
                                                                 
                            
उनकी हर सांस में सिर्फ़ हमारे लिए प्यार झलकता है,
नौ महीने रखा अपनी कोख में,
हमारे लिए हर दर्द सहा,
अपने खून से सींचा हमे,
खुद तकलीफ़ में रही, परंतु,
हमे खुशियों का संसार दिया,
उसकी हर डांट में ममता छिपी,
उसकी खामोशी में भी दुआ,
माँ से ही हम है,
माँ में बसता हमारा पूरा जहान।
- आकांक्षा गुप्ता
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6 घंटे पहले

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