वक़्त कब चैन से गुज़रता है?
देख कर ख़्वाब दिल तड़पता है!
लगता है आफ़ताब भी फ़ीका,
हुस्न का रंग जब चमकता है।
बात जब-जब हुई मोहब्बत की,
ज़ेहन से दिल सदा झगड़ता है।
तोड़ देता है बाँध आँखों का,
दिल में एहसास जब उफ़नता है।
इक परिंदा हवा से जब मिलता,
खोलता है परों को, उड़ता है।
कुछ न हासिल कभी वो कर पाता,
जो हक़ीक़त से दूर चलता है।
कौन दीवार रोक पाएगी?
'अब्र' झोंका हवा का बहता है!
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