तुझसे बिछड़ने के बाद सनम
बर्बाद करता रहा ख़ुद को मैं
जैसे जीने की सोची ही नहीं
बीमार करता रहा ख़ुद को मैं
मैं होश अपना परखता रहा
नशे में मुसलसल बिखरता रहा
पता था मुझे जो पता वो न था
मेरा प्यार करना ख़ता तो न था
मगर इक सज़ा सी मिली उम्र भर
मगर मैं गुनाहगार बन के जिया
जिया मुझसे जाता रहा तो नहीं
मगर मर न पाया, नहीं मौत आई
समझ जाएगी थाम कर तू कलाई
मैं आंसू तेरी आंख का हूं सनम
मैं तेरी ख़ुशी हूं, मैं हूं तेरा ग़म
मैं कुछ और कहना नहीं चाहता
मैं दुनिया में रहना नहीं चाहता
यही ज़िन्दगी है, इसी की क़सम
- मृदुल
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