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काश मैं एक किताब होती

                
                                                         
                            काश मैं एक किताब होती
                                                                 
                            
नहीं सभी,
लेकिन कुछ सवालों का जवाब होती है।
उलझाए रखती खुद को अपने ही अंदर,
और सुलझा देती किसी का जीवन चिरकाल तक।

काश मैं एक किताब होती
यह दुनिया मुझमें तमाम होती।
ना होती कुछ भी इस दुनिया की खबर,
पड़ी होती पुस्तकालय के कोने में बेखबर।

मन शांत होता,
तन पर चढ़ा होताएक नव आवरण।
जिसे जानना होता मुझे,
वह आता मेरे पास चल कर अपने कदमों पर।

मेरा भी कुछ मूल्य होता,
होती कुछ मर्यादा।
नहीं सबको पर कुछ को तो होता,
मेरा ज्ञान थोड़ा ज्यादा।

काश मैं एक किताब होती
नहीं सभी,
लेकिन कुछ सवालों के तो जवाब होती।।
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3 hours ago

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