हिम शिखरों पर गूँजी फिर, भारत की हुंकार,
वीरों ने लिख दी शौर्य की, अमर विजय पतवार।
सीना ताने बढ़ चले, लेकर तिरंगा हाथ,
मातृभूमि की आन हेतु, अर्पित कर दी साँस।
गोली, बम, बारूद भी, जिनको डिगा न पाए,
भारत माँ के वीर सपूत, हँसकर शीश चढ़ाए।
दुर्गम पर्वत, बर्फ़ीली रातें, बन गईं रणभूमि,
शत्रु काँपा देखकर उनकी अद्भुत रणधूमि।
टाइगर हिल से द्रास तक, गूँजा जयघोष महान,
वीर सपूतों के बलिदान से, ऊँचा हुआ सम्मान।
हर सैनिक के रक्त से, तिरंगा और निखरा,
भारत का गौरव विश्व में, स्वर्णिम अक्षर बिखरा।
आओ मिलकर आज करें, उन वीरों को प्रणाम,
जिनके कारण सुरक्षित है, भारत का हर धाम।
कारगिल की विजय गाथा, युग-युग तक दोहराएँ,
वीर शहीदों के चरणों में, श्रद्धा-सुमन चढ़ाएँ।
-अतिशा माथुर
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