जिंदगी तूने मुझे पहले क्यों नहीं बताया
कि खुशी तेरे हिस्से में नहीं
हम गम को ही अपना हमदम मान लेते हैं
क्यों भटकते हम दर ब दर खुशियों की तलाश में
तेरी जिद को हम अपनी खुशियों से कम मान लेते।
- .राजलक्ष्मी राज
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