आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

तेरा मुझसे बिछड़ना भी ज़रूरी था

                
                                                         
                            तेरा मुझसे बिछड़ना भी ज़रूरी था,
                                                                 
                            
तेरा मुझसे लड़ना भी ज़रूरी था।
ज़रूरी था तेरा मुझसे ख़फ़ा होना,
दूर होकर तुझसे मेरा तड़पना भी ज़रूरी था।

जो रिश्ता अधूरा रह गया,
उसका यूँ बिखरना भी ज़रूरी था।
तू समझे मेरी ख़ामोशी को कभी,
इसलिए मेरा तुझसे दूर होना भी ज़रूरी था।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
1 सप्ताह पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर