हार नहीं अंतिम सत्य जगत का,
जीवन का अंतिम विधान नहीं।
रूक जाना ही पराजय होती है,
संघर्षो का अवसान नहीं।
अंधकार चाहे घिर आए,
सूरज फिर भी उग आता है।
सूखी डाली का मौन हृदय भी
फिर हरियाली पा जाता है।
जो गिरकर फिर उठ खड़ा हुआ,
वही शिखरों का अधिकारी है।
आंसू जिसने पीकर हंसना सीखा,
वही समय का अच्छा साथी है।
पथ चाहे पथरीला हो,
साहस कभी थकने मत देना।
हर विफलता के गभ॔ में छिपे
नव-विजय को जन्म लेना है।
हार नहीं अंतिम सत्य जगत का,
आशा का दीप बुझने मत देना।
जब तक श्वासों में स्पंदन है,
स्वप्न अपने बिखरने मत देना।
-आलोक प्रकाश
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