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ऐसे ख़्वाब दिखाए किसने

                
                                                         
                            ऐसे ख़्वाब दिखाए किसने
                                                                 
                            
ये अरमान जगाए किसने
मैं जिनमें ख़ुश नहीं रह सका
वो हालात बनाए किसने
मुझको ग़म अच्छे लगते हैं
ये आंसू ठुकराए किसने
हम वो नहीं जिन्हें तुम होते
जलते लफ़्ज़ बुझाए किसने
किसी की आंखें कुछ कहती थीं
ये क़िस्से समझाए किसने
अपने आप में ही सहना है
किसी के दुख अपनाए किसने
किसी का इतना अच्छा चाह के
इतने क़त्ल कराए किसने
मैं उससे मर के भी मिलूंगा
ये कपड़े पहनाए किसने
नहीं ज़िन्दगी में लगता जी
मौसम हाए बनाए किसने
उसकी याद बहुत आती है
फिर ये दीप जलाए किसने
'रंग' को सोते से न जगाना
ख़्यालात महकाए किसने
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2 महीने पहले

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