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आसमान को ग़म है कुछ

                
                                                         
                            आसमान को ग़म है कुछ
                                                                 
                            
सारा माहौल नम है कुछ
अब जैसा है हाल - ए - दिल
वैसा ही मौसम है कुछ
तुझे देख कर दर्द - ए - जिगर
हां, पहले से कम है कुछ
आज जो ख़्वाहिश होती है
ये ऐसा आलम है कुछ
अपनी दुनिया से कहना
सच्चाई क़ायम है कुछ
मेरा ज़िक्र करना ही मत
शोला है शबनम है कुछ
'रंग' तेरा दीवानापन
उसका कोई करम है कुछ
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2 महीने पहले

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