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धुँधला प्रतिबिंब

                
                                                         
                            एक महाकाव्य सा जोर था
                                                                 
                            
उपन्यास से भी बड़ा शोर था
कलम दूर था,
कागज कोई और था
बस हम सोचते रहे और गुनगुनाते रहे
अक्षर अक्षर मिलाकर शब्द बनाते रहे
कागज जब तैयार हुआ
स्याही सूख चुकी थी
शब्द बिगड़ गए थे
अक्षर खो चुकी थी।
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8 घंटे पहले

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