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क्रिकेट के नए क्षितिज पर भारत

                
                                                         
                            क्रिकेट के नए क्षितिज पर भारत
                                                                 
                            

गेंदों में आग बरसती थी, गावस्कर चट्टान बने,
सीधा बल्ला ढाल बना तो, वेग के तूफ़ान थमे।
विश्वनाथ की कलाई घूमी, रेशम-सी हर धार चली,
बेदी की उड़ती फिरकी में, गेंद हवा से बात चली।
साहस में जब कला मिली तो, भारत ने पहचान बनाई है—
क्रिकेट के नए क्षितिज पर, भारत की ध्वजा लहराई है॥

अमरनाथ संकट में उतरे, धीरज उनका अस्त्र बना,
कपिल के बल्ले और गेंद से, जीत का पहला मंत्र बना।
एक कैच ने साँसें रोकीं, तिरासी ने इतिहास रचा,
जिस भारत को कम आँका था, उसने विश्व-विजय को छुआ।
पहली विश्व-विजय ने घर-घर, सोई आस जगाई है—
क्रिकेट के नए क्षितिज पर, भारत की ध्वजा लहराई है॥

सचिन के सीधे बल्ले में, अनुशासन की शान रही,
सौ अंतरराष्ट्रीय शतकों की, अद्वितीय पहचान रही।
‘क्रिकेट के भगवान’ कहे गए, फिर भी विनम्रता साथ रही,
‘भारत रत्न’ से अलंकृत होकर, देश की ऊँची शान रही।
करोड़ों सपनों को सचिन की साधना ने राह दिखाई है—
क्रिकेट के नए क्षितिज पर, भारत की ध्वजा लहराई है॥

गांगुली ने कमान सँभाली, आँखों में विश्वास नया,
विदेशी धरती पर भी भारत, लेकर उतरा साहस नया।
युवराज, सहवाग, हरभजन पर, दादा ने विश्वास जताया,
आँख मिलाकर जीतना सीखा, भारत ने तेवर अपनाया।
उस निडर नेतृत्व ने टीम में, नई रवानी लाई है—
क्रिकेट के नए क्षितिज पर, भारत की ध्वजा लहराई है॥

द्रविड़ ‘दीवार’ बने तो, वक़्त भी पहरेदार हुआ,
सहवाग का बल्ला गरजा तो, हर डर सीमा पार हुआ।
तीन सौ की सीमा भी उनके, तेवर बाँध न पाई थी,
एक ने धीरज से राह बनाई, दूजे ने आँधी लाई थी।
दो विपरीत स्वभावों ने मिल, जीत की राह बनाई है—
क्रिकेट के नए क्षितिज पर, भारत की ध्वजा लहराई है॥

कुंबले की जिद ने दस विकेट का इतिहास बनाया,
टूटे जबड़े ने भी उनका, हौसला रोक न पाया।
हरभजन की उछाल निराली, अश्विन की गहरी चतुराई,
उड़ान, कोण और चाल बदलकर, फिरकी नई सजाई।
भारत की उँगलियों ने गेंद में, गहरी सोच समाई है—
क्रिकेट के नए क्षितिज पर, भारत की ध्वजा लहराई है॥

छह गेंदों पर छह छक्कों ने, आसमान हिला डाला,
एक ओवर में युवराज ने, इतिहास नया लिख डाला।
ग्यारह में बल्ला, गेंद, जिगर—तीनों ने साथ निभाया,
तन में जंग छिपी थी फिर भी, देश का मान बढ़ाया।
छह छक्कों से संघर्षों तक, हिम्मत रंग लाई है—
क्रिकेट के नए क्षितिज पर, भारत की ध्वजा लहराई है॥

चेहरा शांत, इरादे गहरे, दबावों में धैर्य रहा,
सात में टी-20 ताज मिला, नेतृत्व का नव दौर रहा।
ग्यारह की उस रात प्रहार जब, गगन चीरकर जा पहुँचा,
वानखेड़े से हर भारतीय का, विश्व-विजय सपना गूँजा।
ठंडे मन की गर्म विजय ने, घर-घर खुशी मनाई है—
क्रिकेट के नए क्षितिज पर, भारत की ध्वजा लहराई है॥

विराट की आँखों में बिजली, रनों की भूख अपार रही,
लक्ष्य बड़ा हो जितना, पीछा करने की उतनी धार रही।
एकदिवसीय शतकों में सबसे आगे नाम सजाया,
जुनून, फ़िटनेस, अनुशासन ने ‘किंग कोहली’ बनवाया।
ताज नहीं, हर रन ने उनकी, बादशाहत बनवाई है—
क्रिकेट के नए क्षितिज पर, भारत की ध्वजा लहराई है॥

रोहित के बल्ले में रेशम, प्रहारों में तूफ़ान रहा,
तीन दोहरे शतक बताते, कितना विराट अभियान रहा।
चौबीस में कप्तान बने तो, आगे रहकर राह दिखाई,
सूर्या के सीमा वाले कैच ने, अंतिम साँस थमाई।
एक विश्व-विजय ने फिर करोड़ों, आँखें भरवाई हैं—
क्रिकेट के नए क्षितिज पर, भारत की ध्वजा लहराई है॥

बुमराह की यॉर्कर ने बल्लों से, सारे उत्तर छीन लिए,
सीम, गति और चतुराई से, कितने संकट जीत लिए।
हार्दिक ने अंतिम ओवर में, धड़कन पर पहरा रखा,
चौबीस की उस विश्व-विजय में, दोनों ने दम भर रखा।
रफ़्तार और साहस ने मिलकर, जीत घर पहुँचाई है—
क्रिकेट के नए क्षितिज पर, भारत की ध्वजा लहराई है॥

इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, अफ़्रीका—हर चुनौती स्वीकार हुई,
पाकिस्तान, कीवी, विंडीज़ से, टक्कर भी आर-पार हुई।
बांग्लादेश हो या कोई भी, अब भय का नाम नहीं,
घर हो या परदेस, तिरंगे का विश्वास कभी कम नहीं।
हर मैदान ने भारत के दम की, गाथा दोहराई है—
क्रिकेट के नए क्षितिज पर, भारत की ध्वजा लहराई है॥

देश अलग, भाषाएँ अलग, पर एक ड्रेसिंग-रूम मिला,
कल के प्रतिद्वंद्वी साथ हुए, खेल को नया रूप मिला।
गलियों-कस्बों की प्रतिभा को, विश्व-मंच पर मान मिला,
भारत के इस खेल-महोत्सव से, क्रिकेट को परिवार मिला।
दुनिया भर को साथ मिलाकर, नई बिरादरी बनाई है—
क्रिकेट के नए क्षितिज पर, भारत की ध्वजा लहराई है॥

शुभमन के शॉटों में रेशम, टाइमिंग में संगीत बहे,
नेतृत्व की नई ज़िम्मेदारी, उनके कंधों के संग बढ़े।
वैभव की छोटी उम्र मगर, बल्ले में बेख़ौफ़ी भारी,
‘बॉस बेबी’ की चमक बता दे, कल की पक्की तैयारी।
नई कोंपल ने आज ही कल की, उजली झलक दिखाई है—
क्रिकेट के नए क्षितिज पर, भारत की ध्वजा लहराई है॥

गावस्कर ने राह बनाई, कपिल ने विश्वास दिया,
सचिन ने सपनों को पंख, गांगुली ने साहस दिया।
धोनी ने इतिहास सँवारा, विराट ने जज़्बा जगाया,
रोहित से नवपीढ़ी तक हर युग ने मान बढ़ाया।
हर पीढ़ी ने अगली पीढ़ी की, राह नई दिखलाई है—
क्रिकेट के नए क्षितिज पर, भारत की ध्वजा लहराई है॥

— संतोष कुमार शर्मा
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