भए प्रकट गोपाला, दीन दयाला द्वापर के अवतारी,
धर्म के रक्षक, कर्म के कर्ता, अद्भुत लीलाधारी।।
देवकी ने जाया, यशोदा ने पाया,
वासुदेव ने कालिंदी पार किया।
वासुदेव के नंदन, बने नंद के लाला,
आधी रात में चमत्कार किया।
कारागार में आए गोकुल को धाय, वंशीधारी।।
धर्म के रक्षक, कर्म के कर्ता अद्भुत लीलाधारी।।1।।
कंस को भरमाया, गोकुल में आया,
देवकी का जाया,हर जन को भाया।
प्रेम की बोली प्रेम भक्ति की माया,
प्रेम भाव जन जन में बसाया।
मन के मैल का नाश करने, आया है मुरारी।।
धर्म के रक्षक, कर्म के कर्ता, अद्भुत लीलाधारी।।2।।
पूतना मर गई, मर के तार गई,
कान्हा के प्रभुता की घोषणा कर गई।
शकट जो आ पलने पर गिरा,
यशोदा समेत सब गोपियॉ डर गई।
जिसने तृणावर्त को मारा, हम हैं उसके आभारी।।
धर्म के रक्षक कर्म के कर्ता, अद्भुत लीलाधारी।।3।।
बकासुर अघासुर मारे गए सब,
टूट गया कालिय का अभिमान।
पल में ब्रह्मा का मान गया है,
इंद्र का छूट गया मान गुमान।
उठा लिया गोवर्धन को, बनाकर के गिरधारी।
धर्म के रक्षक कर्म के कर्ता, अद्भुत लीलाधारी।।4।।
भक्तों का मान किया, सम्मान किया,
गोपियों को भक्ति का दान दिया।
माखन चोर बने, नंदकिशोर बने,
गोकुल वालों को भक्ति वरदान दिया।
उनके पीछे चले ग्वाल सब, चलती थी गइयां सारी।।
धर्म के रक्षक, कर्म के कर्ता, अद्भुत लीलाधारी।।5।।
जन-जन में बसो, हर मन में बस
कण कण में बसो, क्षण क्षण में बसो।
भक्त बनाकर अपना लो हमें कन्हैया,
रज रज में बसो, तन मन में बसो।
आकर के उद्धार करो हो जो तुम उपकारी।।
धर्म के रक्षक, कर्म के कर्ता, अद्भुत लीलाधारी।।6।।
- मीतू सिन्हा
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