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ये हवाएँ उनको छू कर आईं है

                
                                                         
                            ये हवाएँ उनको छू कर आईं है।
                                                                 
                            
बेहतरीन ख्वाब ले कर आईं है।।

अब यहाँ खामोश बैठेगा कौन।
हाल-ए-दिल बयाँ करने आईं है।।

इतनी खुशी सम्हाली न जाएगी।
शायद साँसों में घुलकर आईं है।।

बंद पलकों से कतरा गिरा अगर।
रास्ता 'उपदेश' बदलकर आईं है।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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4 दिन पहले

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