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सुकून में ख्वाब आए

                
                                                         
                            थोड़ा खुद से मिलने में अभाव आए।
                                                                 
                            
नींद लो उससे सुकून में ख्वाब आए।।

थकान जायेगी मन की जिस्म की भी।
रात में ऐसी घड़ी मुकद्दर से पाँव लाए।।

रिश्ता कायम रहे रूह का रूह से अगर।
खुशकिस्मती से अंदर नये प्रभाव लाए।।

दिल के सूनेपन से वाकिफ हूँ 'उपदेश'।
तुम्हारे मकान का पता प्यारे भाव लाए।।

मैंने सुन रखा प्रेम दृष्टिहीन होता यारो।
जरूरत के हिसाब से अंदर स्वभाव लाए।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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5 घंटे पहले

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