प्रेमी का दर्जा अन्दर से देती राधा।
सच जाने बखूबी उसे कहते राधा।।
नसीब में प्रेम हरेक को नही बक्शा।
पाने की जिद्द नही ठहराव में राधा।।
ज़माना जिसको लेकर पागल होता।
चोरी छुपे उसके अंदर नाचती राधा।।
राधा बनना 'उपदेश' मुमकिन नही।
फिर भी दिवानगी बना देती राधा।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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