सम्भोग से पहले प्रणय का महत्व समझे।
फूल को छुने से पहले खुशबू को समझे।।
सम्भोग देह का मिलना नही एक लहर है।
विश्वास जन्म लेता उसके भाव को समझे।।
भोर की पहली किरण धीरे-धीरे शिखर छूती।
बर्फ़ के भीतर अनदेखे से झरने को समझे।।
मेरी उँगलियाँ तुम्हारी उंगलियों की भाषा पढ़े।
आँखें मूँदने लगे फिर उठी आवाज को समझे।।
आत्म शान्ति की परिस्थिति का भान होगा।
चेहरे पर खुशी उसमें छुपे 'उपदेश' को समझे।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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