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पैसे के बिना

                
                                                         
                            किसी की आँखों में मजबूरियाँ होती।
                                                                 
                            
पैसे के बिना जरूरतें पूरी नही होती।।

गरीब अमीर की आँखों में सपने बसते।
बिन गणना की योजनाएँ अधूरी होती।।

दर्द त्योहारों पर समझ किसको आता।
बिना रोज़गार के इच्छाएँ अधूरी होती।।

कमाने के चक्कर में घर से दूर हो गए।
कम दौलत से जरूरतें पूरी नही होती।।

जब दवाई लेने को खुद ही उठना पड़े।
घायल मोहब्बत 'उपदेश' सुर्ख नही होती।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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3 महीने पहले

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