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मोहब्बत में साँस ऊपर चढ़ गई

                
                                                         
                            हिदायतें न मानी उलझन में पड़ गई।
                                                                 
                            
मोहब्बत में मेरी साँस ऊपर चढ़ गई।।

पहले प्यार का असर छुअन बेहतर।
आकर्षित होकर एक कदम बढ़ गई।।

करीबी का मन महक भी चमत्कारी।
मन पसन्द खुशबू दिमाग पर चढ़ गई।।

उनके नाम से तन में फ़ुरफ़ुररी उठती।
झरने सी बहने लगती ठंडक बढ़ गई।।

नसीब का खेल 'उपदेश' या कुछ और।
कम वक्त में प्यार की किताब पढ़ गई।।

हमारा जी ही नही लगता उनके बिना।
मदहोश रहती छुअन की आदत पड़ गई।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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6 घंटे पहले

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