इश्क में सचमुच बढ़िया बढ़िया बोले जो।
तन्हा रहने की सजा की कमियां खोले जो।।
यों नही चमकता सूरज अपने वक्त पर।
उसके छलनी होने के राज को खोले जो।।
मोहब्बत का वास्ता बहुत कुछ दबा रखा।
कलम चली अपनी राह दर्द न खोले जो।।
पसंद करते हैं जो ग़ज़लें 'उपदेश' की।
गठरी बना रखी ग़मों की न खोले जो।।
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