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मेरी सादगी

                
                                                         
                            कुछ लोगों के सवाल मेरी सादगी से जुड़े।
                                                                 
                            
दबी जुबान से उन्हीं के एहसास फीके पड़े।।

उन्हीं को भाती नही सच्चाई मेरी आज भी।
बुरे इतने नही है वो बुराई के दलदल में पड़े।।

दिखावे के धनी जो छल कपट से काम लेते।
मुश्किल में जी रहे पाखण्ड के जाल में पड़े।।

अन्दर से टूटे हुए न आँसू सम्हालना सीखे।
दूसरे के पोछने के हुनर से दूर फल में पड़े।।

मैं अक्सर भूल जाती हूँ नाराजगी है उनसे।
नाम जुबान ले लेती 'उपदेश' फजल में पड़े।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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6 घंटे पहले

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