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माना खुदा एक है

                
                                                         
                            इंसान की जिन्दगी मसरूफ किसी के सामने।
                                                                 
                            
मगर हाथ छुड़ाने वाले को 'उपदेश' लगे थामने।।

माना खुदा एक है मगर उस पर अधिकार नही।
उसकी भक्ति करो मन्नतें मांगों रहो खूब दीवाने।।

जो कर्म किया उसका फल यहीं मिलेगा दोस्त।
दोषी कोई भी रहे सजा काटोगे आमने-सामने।।

तन चंदन घिस कर माथे पर तिलक लगा कर।
पाखण्डी ढोंगी कहलाओगे बिना प्रेम के मायने।।

ज्यादातर लोगों को क्षण भर का अभिसार नही।
गुण गान करने में वक्त गया दुनिया भर के सामने।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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9 घंटे पहले

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