मन टूटा जरूर ख्वाहिशें गगन में उड़ने की।
तरह-तरह की मुसीबतें मौसम बिगाड़ने की।।
मानसिक क्लेश से फितरत में उलझनें आई।
फिर भी खुद ने खुद की हौसलाअफजाई की।।
इलाज माफ़िक पाकर तबियत आसमान पर।
चल रहीं व्यवस्था पुरानी हुई रूठने मनाने की।।
जो मन में आया वह लिख दिया बेसुध होकर।
मेरे संघर्ष को जरूरत नही 'उपदेश' सजाने की।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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