सिसकियाँ लेने पर दिल बैठा जा रहा था।
मेरा हमसफर बेइज्जत करता जा रहा था।।
शादी के बाद जिन्दगी में परिस्थितियाँ बदली।
घर का हर सदस्य ठोकर मारता जा रहा था।।
उजड़ते हुए दिल को आँसुओं ने धुल दिया।
सब्र का घूंट पीकर दिल सहता जा रहा था।।
धीरज बंधाने को एक फरिश्ता सामने आया।
माँ-बाप से ज्यादा सहयोग नजर आ रहा था।।
सच्चाई की राह कठिन जरूर होती 'उपदेश'।
रास्ता धुँधला ही सही वह नज़र आ रहा था।।
वक्त की करवट ने उन्हें तितर-बितर कर दिया।
हमसफर को भी हकीकत नज़र आ रहा था।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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