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मत भ्रमित उनकी पहचान बनी धीर लेकर।।

                
                                                         
                            कुछ लोग पैदा हुए सागरों सी पीर लेकर।
                                                                 
                            
घमंड बादलों सा उड़े 'उपदेश' नीर लेकर।।

वेदना के नाम सा उनका कोई चेहरा नही।
चलते अपनी मौज में उथली नजर लेकर।।

जानकार अब क्या करोगे फितरत उनकी।
दर्द से कराहती आकाशगंगा तक़दीर लेकर।।

जीवन का संघर्ष भी कम होते दिखता नही।
ज्ञान के चक्षु अभी तक खुले नही डर लेकर।।

सूक्ष्म दर्शी दृष्टि से आकलन करना कठिन।
मत भ्रमित उनकी पहचान बनी धीर लेकर।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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10 घंटे पहले

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