आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

दिल उदार

                
                                                         
                            कोई तो मिलेगा मुमकिन दिल उदार।
                                                                 
                            
हाथ बढ़ाए या इशारे से करे स्वीकार।।

बहते पानी में डूबे या उतराए संग-संग।
तमन्ना जोर मार रही कभी हो दीदार।।

दुनिया तो लगती करेला नीम चढ़ी सी।
उसके वाबजूद दिल चाहता मिले प्यार।।

जुगनू तितली तारे तब होंगे हक्के-बक्के।
महकी महकी खुशबू के संग रूबरू यार।।

मन ने पहले ही छाप लिया उसका नाम।
जिससे 'उपदेश' मिलेगा करके एतबार।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर