तन्हाई में इंसानियत दरकिनार कर दिया।
जान पाए नफ़रतों से भरे दिलो की गिला।।
दर्द को पूजने की मिल रही सजा उनको।
जिनको भी मोहब्बत में मिली नही सिला।।
खुद कैद कर कमरे में लिखने लगे ग़ज़ल।
उनको उजालों का कहीं मंजर नही मिला।।
ज़ख्म अपने सीने में दबा कर रखने पड़े।
दुसरों के नसीब से यहाँ होता नही भला।।
मैंने देखी अंधेरों की गुस्ताखियाँ 'उपदेश'।
बेगुनाही को कृपा से फ़ैसला नही मिला।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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