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हासिल करने के लिए कोशिश करना चाहिए।

                
                                                         
                            नजर से नजर मिलने पर करार किसे आता।
                                                                 
                            
मुझे ही नही 'उपदेश' तुम्हें भी बेकरार करता।।

पाबंदियां किस तरह पँख फैलाए रोक रही।
उनकी बाते करने भर से बेबस मन रार करता।।

चोरी छुपे ही सही जब भी इशारे निमंत्रण देते।
माहौल माफ़िक नही य़े कहकर तकरार करता।।

बदनामी का डर मुझको ज्यादा उसको कम।
ऐसी सोच रखने वाले का भी तिरस्कार करता।।

हासिल करने के लिए कोशिश करना चाहिए।
ये बात सब पर लागू मगर धीरे से उद्गार करता।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 दिन पहले

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