आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मेरे ख्यालो के बहते दरिया के पानी में।

                
                                                         
                            मेरे ख्यालो के बहते दरिया के पानी में।
                                                                 
                            
अचानक बात हो गई उसकी नादानी में।।

माना कमियाँ बहुत है हर एक इंसान में।
ज़रूरत उसको भी मुझको भी जवानी में।।

मोहब्बत का सुन्दर रूप उसमें जन्म लिया।
हर एक जगह प्रेम दिखता राजा रानी में।।

पहली बार प्रेम सिखाया सीने से लगाकर।
पत्थर को अनश्वर बना दिया मेहरबानी में।।

हर गुप्त प्रतिज्ञा की खुशबू बेहतरीन लगती।
स्वर्ग सा लगता 'उपदेश' सांसो को रवानी में।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 दिन पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर