आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आप पहले से ही किसी के

                
                                                         
                            आप पहले से ही किसी के है।
                                                                 
                            
फिर मेरे ज़ख्म कैसे टटोले है।।

तुम्हारी बाते पहले से अच्छी।
किस दिल के बारे में बोले है।।

करते रहो बात बन जाएगी।
जैसे नाप तोलकर मुँह खोले है।।

लोगों के आगे रोना नासमझी।
सभी के अपने-अपने मसले है।।

तेरा मरहम काम का 'उपदेश'।
मगर संग साथ होने में झमेले है।।

अगर वक्त पर तेरे हो लेते हम।
ज्यादातर जलने वाले सपोले है।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
12 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर