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कहे लिए प्रेम मैं तर जाऊँ।

                
                                                         
                            जे मन अनुराग सो, हृदय बनो निर्मल,
                                                                 
                            
निर्मल बनो, मोरे प्रिय को स्थल। 
ते तोहे निर्मलता ना दर्शे,
तो तू कियो ना स्पर्श।। 

ज्ञान कहे तोहे मान दिलाऊँ,
प्रेम कहे तोहे सरल बनाऊँ। 
गोपी ना जाने मान चाहूँ,
कहे लिए प्रेम मैं तर जाऊँ। 

ना जानू मैं ज्ञान कोई,
मैं तो जानूँ प्रेम। 
ज्ञान अब मोहे रास न आवे,
जो प्रेम लियो मोहे घेर। 

प्रेम मेरो गिरधर गोपाल,
ज्ञान मोहे लगे जंजाल। 
तुम कहो यो ज्ञान बड़ों,
में कहूँ हूँ प्रेम। 
तुम कहो यो अक्षर बड़ों,
पर मेरो प्रेम है हेम। 
 
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4 घंटे पहले

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