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माँ दुखी थी मेरा दुःख देखकर

                
                                                         
                            माँ दुखी थी मेरा दुःख देखकर,
                                                                 
                            
मैं दुखी था माँ को देखकर।
हे प्रभु, यह कैसी लीला है—
पीड़ा एक थी, पर आँसू दो थे।

घाव मेरे हृदय में था,
वेदना उसकी आँखों में।
दर्द मुझे सहना था,
पर टूट रही थी वह मौन में।

ममता का यह कैसा बंधन,
जिसे शब्दों में बाँधा न जाए।
संतान पर छाया दुःख का बादल,
तो माँ ,
आकाश भी रो जाए।
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2 महीने पहले

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