टूटे मन जब राष्ट्र धर्म से,याद शहादतें कर लेना।
चुने गए जो दीवारों में,उनको याद तुम कर लेना।
देश धर्म की ख़ातिर, जो जलियां बाग में जूझ गए,
शहादत उन वीरों की भी,याद जरा तुम कर लेना।
दर्द समझना लाला जी का फिरंगी लाठियां सहने का,
तड़प तड़प उस बज्र बदन की,महसूस तड़प कर लेना।
कटा शीश प्रफुल्ल चाकी का, विस्मृत मत कर देना।
सजे थाल में शीश पुत्रों के,आए जब सम्मुख पिता के,
उस क्षण मनोदशा पिता की महसूस जरा तुम कर लेना।
कर याद सभी शहादतों को, मोल आजादी का कर लेना।
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