गिरि गर्वित हुआ गगन में,झूम शिखा लहराई।
नापाक पाक सैनिकों को,भारत ने धूल चटाई।
दुश्मन जा बैठा चोटी पर,छुप छुप करी चढ़ाई।
मन पाल बहम सिंह का गीदड़ भवकी दिखाई।
लख हालात भारतीय शेरों ने,भी हुंकार लगाई।
पर्वत की बर्फीली छाती पर क़दम दिए बढ़ाई।
छुपा बैठा चोटी पर दुश्मन,रहा गोली बरसायी।
फिर भी वतन की खातिर,कदमों को रहे बढ़ाई।
वतन प्रेम के रंग में रंग,रहे सीने पर गोली खाई
हैं अंग अंग भंग गोली से,फ़िर भी रहे मुस्कुराई।
कर फतह कारगिल देखो ,तिरंगा दिया लहराई।
गिरि गर्वित हुआ गगन में,झूम शिखा लहराई।
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