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खारा समुद्र

                
                                                         
                            क्या ताके साथी दूर तट से
                                                                 
                            
मुझमें ऐसा खोजे क्या
पूछ रहा हूँ आज बता दे
तू मेरे बारे में सोचे क्या

ये आज की कोई बात नहीं है
ना जाने कबसे सोचु मं
जो दे इजाज़त पालन हारें
तेरी जरा बात फिर पूछूँ मं

विशाल होगी तेरी कहानी
एक किस्सा सुना दे कहानी मेसे
सच कहूँ आज हिम्मत हुई हैं
तेरा इतना खारा पानी कैसे

पहली बार कोई बात पूछीं
वो भी ऐसी पूँछी साथी
घाव फिरसे हरे हो गए
कैसी बात ये पूछीं साथी

घाव कितने अंदर मेरे
वो भी आज दिखाता हूं
कैसे हूं मं इतना खारा
वो भी आज बताता हूं

चट्टानों से नदी निकल कर
जमी पे चलती रहती है
अपने साथ खनिज नमक का
संगम लेकर बहती हैं

कमलो की भाती ये नदिया
मुझे देख कर खिलती है
मं ही हु मंजिल इन सबकी
ये मुझसे आ कर मिलती है

कुछ दीन रहती है साथ मेरे
फिर इनका भी कुछ धर्म हैं साथी
जाना इसको फिर से पड़ता
यही तो इसका कर्म है साथी

फिर हवा का चक्कर आता है
मुझे खूब तड़पाता है
मं देखता हु आँखे भरके
वो भाप बना ले जाता है

ध्यान रखना बच्चों का
मुझको ये कह जाते हैं
इनके लाये खनिज नमक
मेरे पास ही रह जाते हैं

हस्ते चहरे तुम जैसो के
सोच कर चुप रहता हूँ
मीठा पानी तुम पिओगे
जहर का घुट मं पिता हू

यही तो है धर्म मेरा
मं भी धर्म निभाता हूं
ऐसा करके साथी मेरे
मं खारा ही रह जाता हूं
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2 महीने पहले

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