तिमिरमय यामिनी, घनघोर नीरद नभ पे छाए हैं
उमड़ आई है कालिंदी, किशन ने पग छुआए हैं
सभी ताले, सभी बेड़ी, सभी पहरे हटा कर के
यशोदा माँ के आँगन में कन्हैया लाल आए हैं
— त्रिशिका धरा
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