मेरे लफ़्ज़ मेरे गुनाहों को बयान करेंगे,
हम इस क़दर तेरा हक़ अदा करेंगे।
तू एक रौशनी थी, जो खो गई अंधेरों में,
हम तुझे अब सितारों में ढूँढ़ा करेंगे।
तस्दीक़ तेरे वजूद की मेरी आँखों में कैद है,
हम तुझे अपने आँसुओं में फ़ना करेंगे।
मुसलसल आती है तू मेरे ख़्वाबों में,
हम रातभर जागकर तुझसे जफ़ा करेंगे।
हक़ीक़त में तुझे अपना बना न सके मगर,
हम अपने ख़्वाबों में तुझसे वफ़ा करेंगे।
तेरी बेरुखी ने सिखाया है जीने का सलीका,
हम अब अपनी तन्हाई से मशवरा करेंगे।
जो ज़ख्म दिए हैं तूने तोहफ़े में हमें,
उन्हें हम अपनी नज़्मों का काफ़िया करेंगे।
ये दुनिया पूछेगी जब हमारी उदासी का सबब,
हम हँस कर तेरा ही नाम लिया करेंगे।
मिलेगा जब भी ज़िक्र वफ़ा का महफ़िलों में,
हम तेरी बेवफ़ाई का ही क़सीदा करेंगे।
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