ज़िंदगी कोसती है
हमें,,
सारा सरमाया* लेने
के बाद भी,
ज़िंदगी कोसती है
हमें।
*धन /दौलत
ताउम्र तेरी ख़िदमत*
में खड़े रहे,
फिर भी अ ज़िंदगी
क्यूं कोसती है हमें।
*सेवा में
ना सजदा वालिद*
को ,
ना ही वालिदा*' को,
ना बड़े ना बजुर्ग
को किया,
तेरी चौखट पे
गुज़ार दी ख़ुदी
हमने ,
फिर भी ज़िंदगी देती
शिकायत,है हमें।
*पिता
*' माता
सारी की सारी
नेमतें तुझ पे क़ुर्बाँ
कर दीं हमने,
दिल ओ जाँ
भी निसार कर दी
हमने,
फिर भी तू
शिकायत देती है
हमें।
तेरी ज़ुस्तज़ू* में
मुहब्बत को इबादत
बना डाला हमने,
फिर भी क्यूं??!
* खोज/तलाश
अ ज़िंदगी तू
कोसती है हमें।
कभी मौत ने जो
माँगा हाथ जो मेरा
तू फ़ना* हो जायेगी
पल में,
समझ ना कुछ तो
समझ,
इस फ़ानी*' से बुलबुले को,
अ ज़िंदगी क्यूं कोसती है हमें।
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